अनुपम दुबे माफिया नंबर-30:ADG लॉ एंड ऑर्डर ने जारी की 60 माफियाओं की लिस्ट, फर्रुखाबाद का रहने वाला है अनुपम

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फर्रुखाबाद के फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी बसपा नेता अनुपम दुबे का नाम माफिया की सूची में तीसरे नंबर पर है। कानपुर मंडल में केवल इसका ही नाम है। अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था ने निर्देश दिए हैं कि माफिया और उसके सहयोगियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की समीक्षा पुलिस महानिदेशक द्वारा प्रत्येक सप्ताह की जाएगी।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार द्वारा जारी प्रदेश स्तरीय 60 माफिया की सूची में तीसरे नंबर पर दर्ज फतेहगढ़ के मोहल्ला कसरट्टा निवासी बसपा नेता अनुपम दुबे कानपुर में पुलिस इंस्पेक्टर राम निवास यादव की हत्या और पीडब्ल्यूडी ठेकेदार मोहम्मद शमीम की हत्या के मामले में मैनपुरी जिला कारागार में बंद है। उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की भी कार्रवाई की जा चुकी है।
अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था ने कार्रवाई का साप्ताहिक विवरण प्रत्येक सप्ताह शनिवार को अपराह्न 12 बजे तक मुख्यालय को ईमेल कर उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। स्थानीय पुलिस द्वारा भी की गई कार्रवाई की समीक्षा भी की जाएगी। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा ने प्रदेश स्तर पर बनाई गई सूची में अनुपम दुबे का नाम होने की पुष्टि करते हुए बताया, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। सहयोगी पर भी नजर रखी जा रही है।
उत्पीड़न करने के लगाए आरोप
अपर पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था प्रशांत कुमार की ओर से प्रदेश के 60 भू-माफियाओं की सूची में बसपा नेता अनुपम दुबे को भी शामिल किया गया है। इस पर उनकी पत्नी मीनाक्षी दुबे ने कई सवाल खड़े किए हैं। कहा, उनके पति पर सिर्फ 3 पुराने मुकदमे ही विचाराधीन हैं। 28 मुकदमों में वह दोष मुक्त हो चुके हैं और पुलिस ने आपराधिक इतिहास बढ़ाने के लिए खुद वादी बनकर कुछ मुकदमे दर्ज कराए हैं।
मुकदमों की संख्या अधिक दर्शा कर प्रशासन उच्चाधिकारियों को भ्रमित कर रहा है। 14 जुलाई 2021 को अदालत में हाजिर होने तक 17 साल कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद चंद दिनों में ही 6 मुकदमे दर्ज कराए गए। कहा, डॉ. अनुपम ने वर्ष 2000 में नगरपालिका फर्रुखाबाद, 2012 में सदर फर्रुखाबाद, 2017 में शवाजपुर हरदोई से विधानसभा का चुनाव लड़ा। वर्ष 2005 से 2018 तक प्रशासन ने सरकारी सुरक्षा भी उपलब्ध कराई।
स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने अच्छे काम के लिए प्रशस्ति पत्र भी दिए। ऐसे में फरार अभियुक्त कैसे हो सकते हैं। पुलिस और प्रशासन जानबूझकर उत्पीड़न कर रहा है। उन्होंने किसी भूमि पर कब्जा नहीं किया, सभी का बैनामा है। कारोबार के अनुसार आयकर भी देते हैं। इसके बाद भी उनके खाते और संपत्तियों को सीज कर उत्पीड़न किया जा रहा है।
संजय श्रीवास्तव- समूह सम्पादक (9415055318)
शिविलिया पब्लिकेशन- लखनऊ,
अनिल शर्मा- निदेशक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम

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