अहम सबूत खा गई खाकी

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कानपुर: देश को हिला देने वाला बिकरू कांड पुलिस के गले की फांस बन गया है। कदम-कदम पर पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। यहां तक कि पूर्व डीआईजी सहित 8 पुलिस अफसर न्यायिक जांच में दोषी भी पाए गए हैं। अब इस मामले में पुलिस की एक और बड़ी चूक सामने आई है। अगर समय रहते इसकी जानकारी न होती तो आरोपियों को इसका फायदा मिल सकता था। केस के ट्रायल की तैयारी के लिए पूरे मामले के दस्तावेज और इविडेंस तलाशे गए तो पता चला कि पुलिस ने न तो बिकरू गांव का स्थलीय निरीक्षण किया और न वहां की मिट्टी इविडेंस के रूप में रखी। जिससे पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। फौरन चार सीनियर आईपीएस-आईएएस की एसआईटी बनाकर स्थलीय निरीक्षण के कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। टीम 15 दिन के अंदर अपनी रिपोटर्1 सौंपेगी।
गायब तो नहीं कर दिए दस्तावेज
स्थलीय निरीक्षण न करने की गलती बिकरू कांड के बाद हुए आरोपियों के एनकाउंटर के दौरान भी की गई। हालांकि जब विकास दुबे का एनकाउंटर किया गया था उस दौरान जरूर घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण तत्कालीन एसएसपी ने किया था। जिसकी रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई थी। ये रिपोर्ट एसआईटी और न्यायिक आयोग की जांच में लगाई गई है। 2 जुलाई 2020 को हुए सनसनीखेज बिकरू कांड को 14 महीने बीत चुके हैं। तमाम जांचें भी हो गई लेकिन स्थलीय निरीक्षण न कराए जाने की जानकारी किसी अधिकारी को नहीं हो पाई। जांच करने वालों ने भी इसकी जरूरत नहीं समझी। न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद जब इसकी जानकारी हुई तो इस कांड की पैरवी के लिए तैयार किए गए वकीलों से बात की गई। इन पांच वकीलों ने जब दस्तावेज खंगाले तो हड़कंप मच गया। सवाल ये भी है कि स्थलीय निरीक्षण किया गया या नहीं? किया गया तो फाइलों से ये इसके दस्तावेज गायब कर दिए गए? ये किसने किया और किसको फायदा पहुंचाने के लिए? इसे अधिकारी जांच का विषय बताते हैं।
अधिकारियों के होंगे बयान
जानकारी सामने आते ही किसी पर इसकी गाज गिरे, उससे पहले ही चार सीनियर अधिकारियों (जिनमें दो आईपीएस और दो आईएएस) की एक एसआईटी गठित की गई है। जिनसे सात दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है। एडीजी भानु भास्कर ने इस मामले में रिपोर्ट मिलने के बाद ट्रायल पर आने की बात कही है। साथ ही ये भी बताया है कि वारदात के दौरान जो अधिकारी जिले में तैनात रहे थे। उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे्। उनसे जानकारी ली जाएगी कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126

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