कालपी सीट से ठाकुर नेताकोही भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद

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टिकट के लिए वर्तमान विधायक नरेन्दॗ पाल सिंह जादौन, पुर्वविधायक संतराम सिंह सेंगर, पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहॎन, किसान संघ के पाॗतीय नेता राजेश सिंह है पॗबल दावेदार

राजीनित के पंडितयदि वर्तमान विधायक का टिकट कटा तो फिर संत रॎम सिंह सेंगर , भाजपा के जिलाध्यक्ष रामेन्दॗ सिंह बना जी तथा छोटे सिंह मे से किसी एक का टिकट पक्का मान कर चलरहे है

अनिल शर्मा + संजय श्रीवास्तव

लखनऊ | वैसे तो भाजपा के तमाम ब्राह्मण , भाजपा के पाॗतीय नेता संजय त्रिपाठी संघ के पूर्व ॗपॗचारक एवं कॎनपुर बुंदेलखंड के क्षेत्रीय मंत्रीसंजीव उपाध्याय, तथा भाजपा कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र की महिला मोर्चा की अध्यक्ष और उर्विजा दी क्षित के नाम पॗमुख रुप से चर्चा मे | इसके विरोध में एक बात कही जा रही है कि जो लोग संगठन के पदाधिकारी हैं उन्हें टिकट नहीं मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं है अगर कोई प्रत्याशी जीता हुआ दिखाई देगा तो उसे पार्टी नेतृत्व टिकट दे सकता ब्राह्मण महिला को अगर टिकट देने की बात आई तो और उर्विजादीक्षित भी एक पॗबल दावे दार होसकती है | लेकिन लखनऊ के भाजपा के संगठन से छन छन कर आ रही है खबर से साफ है कि कालपी में इस बार भी ब्राह्मण को नहीं बल्कि ठाकुर बिरादरी की के नेता को ही टिकट मिलने जा रहा है| पार्टी नेतृत्व ने करीब-करीब यह मन बना लिया है कि भाजपा के प्रदेश में एक तिहाई विधायकों के टिकट कटना है अगर इस मामले में भाजपा के सौम्य और सरल स्वभाव के विधायक कालपी नरेंद्र सिंह जादौन का नाम भी टिकट कटने वालों की सूची में शामिल हो जाता है तो फिर इस क्षेत्र से भाजपा से टिकट के लिए जो प्रमुख दावेदार हैं उनमें पूर्व विधायक संतराम सेंगर जो माधवगढ़ विधानसभा से वर्ष 1996 में विधायक निर्वाचित हुए थे लेकिन वर्ष 2002 के के चुनाव में 13 सौ मतों से बसपा के पूर्व विधायक तथा पूर्व मंत्री विजेंद्र सिंह से चुनाव हार गए थे पार्टी के शीर्ष नेताओं ने श्री सेंगर पर एक बार फिर विश्वास जताते हुए वर्ष 2007 में फिर से श्री सेंगर को टिकट दिया लेकिन वह इस बार भी बसपा के प्रत्याशी हरिओम उपाध्याय से लगभग 2300 वोटों से चुनाव हार गए बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ने अपने मंत्रिमंडल में हरिओम उपाध्याय को राज्य मंत्री बना कर उनका जिले की राजनीति में कद ऊंचा कर दिया |इसके बाद भी पार्टी ने वर्ष 2012 में भी फिर से श्री सेंगर को टिकट दिया लेकिन इस बार बाजी बसपा के प्रत्याशी संतराम कुशवाहा ने मारी|इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पूर्व जिला अध्यक्ष मूलचंद निरंजन को प्रत्याशी बनाया और उन्होंने बसपा के प्रत्याशी को लंबे अंतराल से हराकर बाजी मारी। चर्चा यह है की चौकी माधवगढ़ क्षेत्र के 28 से 30 गांव जो ठाकुर बिरादरी की सिंगर धार के हैं जहां ठाकुरों की अच्छी खासी संख्या है यह गांव अब कालपी विधानसभा क्षेत्र में आ गए हैं इसलिए पूर्व विधायक संतराम सिंगरपुर एक टिकट करता है तो ठाकुर बिरादरी की ओर से एक प्रबल दावेदार माना जा रहा है इसके अलावा भाजपा के वर्तमान जिला अध्यक्ष रामेंद्र सिंह ब ना जी जो भाजपा के प्रदेश नेतृत्व में गहरी पहुंच रखते हैं को भी कालपी विधानसभा सीट से प्रबल दावेदार माना जा रहा ह वही कालपी विधानसभा सीट से वर्ष 2007 में बसपा के टिकट पर विधायक बने छोटे सिंह चौहान जो पिछले दिनों भाजपा में शामिल हो गए हैं बे चूंकि84 क्षेत्र के हैं|इस क्षेत्र के ठाकुरों मतदाताओं की संख्या लगभग 40 से 45000 मानी जा रही है इसलिए वह संख्या बल में प्रबल दावेदार बनकर उभर रहे हैं| उनके विरुद्ध केवल एक बात यह है पूर्व विधायक उमा कांति सिंह जो 84 क्षेत्र की ही ठाकुर बिरादरी की है वह वर्ष 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीती हैं यदि कांग्रेस ने उन्हें फिर से इस बार टिकट दे दिया तो 84 क्षेत्र के ठाकुरों के मतों में निश्चित रूप से बटवारा हो सकता है और यही छोटे सिंह के लिए माइनस पॉइंट है पूर्व प्रचारक और भारतीय किसान संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री राजेश सिंह नूरपुर भी टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार भाजपा के वर्तमान जिला अध्यक्ष रामेंद्र सिंह बना जी के बारे में भी यही तर्क दिया जा रहा है क्योंकि संगठन के वह जिलाध्यक्ष है इसलिए पार्टी उन्हें टिकट ना दे लेकिन यह भी देखने को मिला है की पार्टी में अपने ऊपर तक रसूख रखने वाले नेताओं को नियम कानून तोड़कर भी टिकट दिए गए हैं इसलिए बना जी को हल्के में नहीं लिया जा सकता बहराल जिले के तीनों वर्तमान विधायक टिकट कटने की आम चर्चा को लेकर खासे चिंतित हैं उनके परिजन और उनके समर्थक और शुभचिंतक भी ऊपर वाले से यही मना रहे हैं कि उनके टिकट ना कटे लेकिन अगर कालपी का टिकट कटा तो पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर और वर्तमान जिला अध्यक्ष रामेन्दॗ सिंह बनॎजी मेसे कोई एकयदि अचानक टिकट लेकर आजाए तो आशचर्य नही करना चाहिए | पार्टी नेतृत्व ने जो गोपनीय सर्वे करवाया है और इसी तरह संघ ने भी जो गोपनीय सर्वे करवाया है उसमें प्रमुख रूप से यह बिंदु रखे गए हैं की किन किन विधायकों ने 5 साल की अवधि में अपने रिश्तेदार को या अपने करीबियों को प्रतिनिधि बनाकर किस तरह से अकूत संपत्ति जमा की है विधायकों के ऊपर पिछले 5 साल में हत्या डकैती अपहरण बलात्कार से संबंधित तो कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुए हैं तथा समाज में उनकी छवि कैसी है क्या वे जनता की सेवा में निरंतर तैनात रहते हैं इन सब बिंदुओं के आधार पर भाजपा के विधायकों का जो रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया है उसमें भाजपा 312 विधायकों में से एक तिहाई विधायकों के टिकट कटना प्रदेश में लगभग तय माना जा रहा है भाजपा के कुछ नाराज कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि अगर जिले में किसी भी विधायक का टिकट कट जाए तो उसकी सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि पिछले 5 वर्षों में वह आर्थिक रूप से इतने मजबूत हो गए हैं के उनको माननीय विधायक का पद भले कम आना पड़े लेकिन समाज में संपत्ति के बल पर उन्होंने अपनी एक अच्छी खासी पहचान बना ली है इसलिए विधायक का टिकट कट जाने पर भी उनकी सेहत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला.

संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126

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