लॉक डाउन खुलते ही बुंदेलखंड प्रथक राज्य का आंदोलन फिर तेज होगा

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उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश दोनो प्रदेशों के सत्तारूढ़ दल भाजपा के प्रदेश अध्यक्षों की कर्म भूमि है बुंदेलखंड

बुंदेलखंड प्रथक राज्य आंदोलन के सभी संगठनों के नेता व कार्यकर्ता दोनो प्रदेश अध्यक्षों से वार्ता करेंगे

अनिल शर्मा+संजय श्रीवास्तव+डॉ. राकेश द्विवेदी
लखनऊ+भोपाल: जबसे उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ दल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष क्रमशः स्वतंत्र देव सिंह और बी.डी शर्मा बने है। तबसे बुंदेलखंड प्रथक राज्य आंदोलन के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं में नई आशा का संचार हुआ है। उन्हें विश्वास है कि अब बुंदेलखंड प्रथक राज्य बनाने की लड़ाई असरदार हो जाएगी।
मालूम हो कि उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार दोनो प्रदेशों में सत्तारूढ़ दल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष क्रमशः स्वतंत्र देव सिंह और बी.डी. शर्मा बनाये गए हैं। जिनका जन्म भले ही बुंदेलखंड में न हुआ हो। लेकिन ये दोनों वरिष्ठ भाजपा नेता अपनी कर्मभूमि बुंदेलखंड को ही मानते हैं।
उत्तरप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का जन्म मिर्ज़ापुर में हुआ था। उस समय उनके घर वालो ने उनका नाम कांग्रेस सिंह रखा था। लेकिन बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(RSS) के निकट आने के कारण उनके भीतर राष्ट्रवादी संस्कार पड़े। इसके बाद वे बुंदेलखंड के जनपद जालौन में विद्यार्थी परिषद के पूर्णकालिक प्रचारक बनके आए। कुछ महीने उन्होंने स्वतंत्र भारत अखबार में जिला संवाददाता के रूप कार्य किया। लेकिन उनका मन संगठन के कामों में ही ज़्यादा लगता था। इसके बाद विद्यार्थी परिषद से भारतीय जनता युवा मोर्चा मे गए। जहां विभिन्न पदों में काम करते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बने। इसके बाद वे भाजपा के प्रदेश महामंत्री, दो बार एम.एल.सी. बनने के बाद प्रदेश के परिवहन मंत्री भी बने। इसके बाद अब उन्हें सत्तारूढ़ दल भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का गुरुतर दायित्व दिया गया है।
वहीं मध्यप्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता बिष्णु दत्त शर्मा जो बी.डी. शर्मा के नाम से विख्यात हैं। उनका जन्म मध्यप्रदेश के मोरेना जिले में हुआ। वो भी बचपन से RSS के सम्पर्क में आए और संघ के एक अनुसांघिक संगठन विद्यार्थी परिषद के प्रचारक के रूप में उन्होंने शुरुआत की। इसके बाद वो विद्यार्थी परिषद के प्रांतीय संगठन मंत्री रहे। फिर संघ की योजना से श्री शर्मा भाजपा में आए और अपनी कुशल संगठन क्षमता के बल पर वे मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश महासचिव बने। इसके बाद वर्ष 2019 में खजुराहो संसदीय सीट से भाजपा के सांसद चुने गए। अब वो भाजपा के मध्यप्रदेश के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष हैं। श्री शर्मा ने अपनी कर्म भूमि मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र को बनाया है।
स्वतंत्र देव सिंह के उत्तरप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बन जाने तथा बी.डी. शर्मा के मध्यप्रदेश से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बन जाने से अब बुंदेलखंड वासियों, बुंदेलखंड प्रथक राज्य आंदोलन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं में नई आशा का संचार हुआ है। उन्हें विश्वास है कि अब बुंदेलखंड प्रथक राज्य की लड़ाई असरदार हो जाएगी। बुंदेलखंड प्रथक राज्य चाहने वाले विभिन्न संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने यह मन बनाया है कि अब कोरोना महामारी के चलते जो देश व्यापी लॉक डाउन हुआ है। यह लॉक डाउन जैसे ही खुलेगा प्रथक बुंदेलखंड राज्य की मांग करने वाले विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, झाँसी और छतरपुर में गोपिनीय बैठक करेंगे और आंदोलन की रणनीति बनाएंगे। क्योंकि उन्हें मालूम है कि बुंदेलखंड प्रथक राज्य निर्माण के लिए सबसे सही समय यही होगा। वैसे भी भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और भाजपा की नीति छोटे छोटे राज्यों को बनाने की है। बुंदेलखंड प्रथक राज्य की मांग कर रहे सभी संगठनों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को यह पता है कि उत्तरप्रदेश में वर्ष 2021 मे विधानसभा चुनाव होने है, और मध्यप्रदेश में वर्ष 2023 मे विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में बुंदेलखंड को अपनी कर्मभूमि मानने वाले उत्तरप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व एमएलसी स्वतंत्र देव सिंह और मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद बी.डी. शर्मा की अहमियत बुंदेलखंड प्रथक राज्य के लिए और भी ज़्यादा बढ़ गयी है। चूंकि केंद्र में भाजपा की मजबूत सरकार है और नरेंद्र मोदी जैसा ताकतवर प्रधानमंत्री है और सौभाग्य से उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में भी भाजपा की सरकारें हैं। और उससे भी बड़ी बात उत्तरप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह तथा मध्यप्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.डी. शर्मा दोनो की ही कर्मभूमि बुंदेलखंड है। और इन दोनो का बुंदेलखंड से विशेष लगाव है। इसलिए बुन्देलखंडियों को लगता है कि प्रथक राज्य बनने के लिए इतनी सारी अनुकूलताएं पहली बार सामने आई हैं। इसलिए बुंदेलखंड प्रथक राज्य आसानी से बन जाना चाहिए।
बुंदेलखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय, बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय पदाधिकारी डॉ. बाबू लाल तिवारी, बाँदा जिला बार संघ के पूर्व अध्यक्ष आनंद सिन्हा, पूर्व बार संघ अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू, प्रसिद्ध समाजसेवी उमा शंकर पांडेय, आशुतोष त्रिपाठी एडवोकेट, मुक्ति मोर्चा पत्रिका के संपादक गोपाल गोयल, प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित, बाँदा के पूर्व कैप्टन सूर्य कुमार पांडेय, बुंदेलखंड किसान यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष विमल शर्मा, बुंदेलखंड इंसाफ सेना के केंद्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री बादशाह सिंह, बुंदेलखंड विकास के लिए अनशन और आमरण अनशन करने वाले महोबा के वरिष्ठ पत्रकार तारा चंद्र पाठकार, प्रखर समाजसेवी राम कृष्ण शुक्ला, बुंदेलखंड की खुशहाली के लिए हाइकोर्ट मे लगातार जनहित याचिका दायर करने वाले रविन्द्र पाठकार, समाजसेवी राकेश सिंह चौहान गुरुजी, पूर्व मंत्री हरिओम उपाध्याय, समाजसेवी अशोक गुप्ता महाबली, झाँसी के किसान नेता गौरी शंकर बिदुआ, पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत, के अलावा RTI एक्टिविस्ट मुदित चिरवारिया एवं मध्यप्रदेश बुंदेलखंड के समाजवादी चिंतक व पूर्व मंत्री राजा पटेरिया(दमोह), सामाजिक कार्यकर्ता अश्विनी कुमार दुबे(खजुराहो), पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद द्विवेदी(छतरपुर), भुवनेश त्रिपाठी(लौड़ी छतरपुर), सामाजिक कार्यकर्ता अजय नाम देव(टीकमगढ़), राजकुमार अहिरवार(निवाड़ी), मुकेश यादव(टीकमगढ़), ज्ञानेंद्र सिंह(पन्ना), ब्रजेन्द्र चौबे(सागर), संजीव गुप्ता, शाहजहां कुरेशी(दतिया) आदि मध्यप्रदेश एवम उत्तरप्रदेश के पदाधिकारी व कार्यकर्ता लॉक डाउन के बाद झाँसी, छतरपुर या दतिया शहरों में गोपिनीय बैठक कर प्रथक बुंदेलखंड राज्य की रणनीति बनाएंगे। इसके बाद सभी संगठन मिलकर प्रथक बुंदेलखंड राज्य के आंदोलन को कैसे तेज किया जाए इसकी भी रणनीति बनाएंगे। इसके बाद प्रथक बुंदेलखंड राज्य के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों का एक प्रतिनिधि मंडल दोनो प्रदेश अध्यक्षों क्रमशः स्वतंत्र सेव सिंह एवम बी.डी. शर्मा से मिलेगा तथा उनसे बुंदेलखंड क्षेत्र का कर्ज चुकाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलकर वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव के पहले उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश को मिलाकर प्रथक बुंदेलखंड राज्य बनवाने के लिए बुन्देलखंडियों की भावनाओं से श्री मोदी को अवगत कराएंगे। और बुंदेलखंड की जनता की मांग होगी कि कैसे बुंदेलखंड प्रथक राज्य बने। इसके लिए ज़रूरी हुआ तो वह आंदोलन भी करेगी।

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