सरकार की दमनकारी नीतियों से किसान आंदोलन नहीं रुकेगा- राजवीर सिंह जादौन

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अनिल शर्मा + संजय श्रीवास्तव
8 माह से चल रहा है किसान आंदोलन 500 किसान अब तक हो चुके हैं शहीद
अगर तीनों कृषि कानून सही है तो सरकार ने 11 बार बार्ता करके संशोधन क्यों किए
जरूरत पड़ी तो किसान दिल्ली की तरह लखनऊ को भी घेरेंगे
उरई(जालौन)। केंद्र सरकार किसानों के खिलाफ दमनकारी नीतियां बंद करें उन्हें खालिस्तानी, आतंकवादी कहकर फर्जी तरीके से बदनाम करने की कोशिश ना करें वरना आंदोलन और तेज होगा यह बात दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन से 8 माह बाद घर लौटे भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने कही।
वह आज मंगलवार को अपने आवास में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो किसान आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर दिल्ली की तरह प्रदेश की राजधानी लखनऊ को भी घेर देगे। एक सवाल के जवाब में श्री जादौन ने बताया कि किसानों की जायज मांगों को लेकर तथा एमएसपी को परमानेंट करने के लिए तथा केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आमदनी दुगनी करने के वादे को जमीन में उतारने के लिए देश भर के 48 किसान संगठनों का संयुक्त किसान मोर्चा बीती 27 नवंबर 2020 से लगातार आंदोलन दिल्ली में कर रहा है। उन्होंने कहा की अगर किसानों को खालिस्तानी, आतंकवादी कहकर बदनाम करने की कोशिश की गई तो यह आंदोलन और तेज होता जाएगा। उन्होंने कहा कि हम दिल्ली के साथ-साथ प्रदेश की राजधानी लखनऊ को भी घेर देंगे उन्होंने कहा कि अगर सरकार तीनों काले कानूनों को सही मानती है तो उसने किसानों को पत्र देकर बार-बार वार्ता के लिए क्यों बुलाया और किसान नेताओं के कहने पर 11 बार इन तीनों कानूनों में संशोधन क्यों किए इससे साफ साफ सरकार की नियत में खोट है एक सवाल के जवाब में श्री जादौन ने कहा कि आज किसानों का आंदोलन दुनिया का सबसे बड़ा आंदोलन बन गया है।क्योंकि दिल्ली में पिछले 8 महीनों से यह लगातार चल रहा है।लेकिन आश्चर्य की बात है की हजारों किसान 8 माह से दिल्ली के सिंधु बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर सहित विभिन्न बॉर्डरो में लगातार धरना दे रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे आंखें मूंदे हुए हैं। दुनिया भर में थू थू हो रही है उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को सरकार तोड़ने की कोशिश कर रही है।जो किसी तरह से संभव नहीं होगा। किसानों को सम्मान साहित सरकार बुलाए जैसे पहले पत्र देकर बुलाती थी। उन्होंने कहा कि सरकार की देरी करने से यह आंदोलन खत्म नहीं होगा। बल्कि और तेज होता चला जाएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पूरे देश के किसानों को इस आंदोलन में शहीद हुए 500 किसानों के शहीद होने पर गहरा दुख व्यक्त है। सरकार की ओर से ना तो प्रधानमंत्री ने ना ही कृषि मंत्री ने किसानों के परिजनों को सांत्वना देने की कोई जरूरत नहीं समझी उन्होंने कहा चाहे वर्ष 2014 के या फिर 2019 के लोकसभा चुनाव रहे हो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से किसानों को सपने दिखाए थे उनकी बातों को मानकर किसानों ने उन्हें वोट दिया।लेकिन उन्हें यह जानना चाहिए यदि किसान आंदोलन जारी रहा तो 2022 के विधानसभा चुनाव में एवं 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार देखना पड़ेगी। इस दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर केदारनाथ, मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बृजेश राजपूत, जिलाध्यक्ष डॉक्टर दिरजेंद्र पटेल रामकुमार पटेल साहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.
सुझाव एवम शिकायत- प्रधानसम्पादक 9415055318(W), 8887963126

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