स्वामी प्रसाद मौर्य के ट्रेलर से हिला यूपी का चुनावी सिनेमा…ऐसे बनी पिक्चर

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यंग भारत ब्यूरो
चुनाव क्या आए सूबे में फिल्मों की तरह रोज-रोज नए-नए सियासी ट्रेलर रिलीज होने शुरू हो गए हैं. इस चुनावी सिनेमा का ताजा ट्रेलर रिलीज हुआ है स्वामी प्रसाद मौर्य के रूप में. जी हां, सूबे की सियासत में अहम स्थान रखने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक ऐसा ट्रेलर दिखा दिया जिसकी बीजेपी ने सपने में भी कभी उम्मीद नहीं की थी. वह बीजेपी का कमल छोड़कर साइकिल पर सवार होने के लिए चल पड़े हैं. ये ट्रेलर बता रहा है कि आगे आने वाली कहानी बड़ी ही शानदार होगी. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस स्क्रिप्ट की नींव कैसे पड़ी. कौन है इस पूरी पिक्चर का डायरेक्टर और पटकथा लेखक. अखिलेश यादव, स्वामी प्रसाद मौर्य या फिर सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर. बरहाल, 14 जनवरी को पूरी पिक्चर रिलीज होने जा रही है. बीजेपी को डर सता रहा है कि ये नई पिक्चर कहीं उसकी पूरी कहानी न बिगाड़ दे. चलिए जानने की कोशिश करते हैं इसकी स्क्रिप्ट के बारे में.
स्क्रिप्ट एक
बीते दिनों अनिल राजभर से जब एक इंटरव्यू में पूछा गया कि आखिर उन्होंने बीजेपी क्यों छोड़ी तब उन्होंने आरोप लगाया था कि गृह मंत्री अमित शाह, सीएम योगी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह जैसे नेता किसी से मिलते ही नहीं हैं. ऐसे में हम अपनी समस्या किसके सामने रखे. कुछ ऐसा ही स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भी होने की संभावना जताई जा रही है. शायद यह भी उनकी नाराजगी की वजह है.
स्क्रिप्ट दो
बीते दिनों बीजेपी ने अखिलेश यादव को कानपुर और कन्नौज में पम्मी जैन और अन्य कारोबारियों के घर पर आईटी और जीएसटी के छापों में घेरने का काम किया था. आशंका जताई जा रही है कि अखिलेश इसका बदला लेने के लिए ही अब आक्रामक हो गए हैं और किसी भी कीमत पर भाजपा के बड़े चेहरों को सपा में लाकर इस हमले का जवाब देना चाहते हैं. स्वामी प्रसाद मौर्य का विकेट गिराकर उन्होंने एक तरह से भाजपा से बदला लिया है.
स्क्रिप्ट तीन
यूपी में मौजूदा चुनावी लड़ाई भाजपा और सपा के बीच कही जा रही है. बीजेपी के बड़े नेताओं को डर है कि कहीं जनता की नाराजगी उन्हें न भुगतनी पड़ जाए. सपा की ओर से गणित दी जा रही है कि मुस्लिम और यादव (एमवाई फैक्टर) के साथ अब पिछड़ा वोट बैंक भी उसके साथ तेजी से आ रहा है. सर्वण वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी से नाराज बताया जा रहा है. इसका झुकाव भी सपा की ओर ज्यादा बताया जा रहा है. शायद इस वजह से भी स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी छोड़ने को मजबूर हुए.
स्क्रिप्ट चार
स्वामी प्रसाद मौर्य काफी सीनियर नेता माने जाते हैं. जब वह बसपा में थे तो वह नंबर दो की हैसियत पर थे, जब वह बीजेपी में आए तो साइडलाइन कर दिए गए. उन्हें उम्मीद थी कि वह डिप्टी सीएम के समतुल्य कुर्सी पाएंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं. उनकी नाराजगी की एक वजह यह भी मानी जा रही है. एक टीवी को दिए गए इंटरव्यू में खुद स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा था कि उन्होंने कई मंचों पर अपनी बात रखी लेकिन वह सुनी ही नहीं गई. इसे लेकर उन्होंने नाराजगी जताई थी.
स्क्रिप्ट पांच
विधानसभा चुनाव 2022 में स्वामी प्रसाद मौर्य को पीएम मोदी, सीएम योगी जैसे बड़े नेताओं से दूर ही रखा गया. प्रचार में बड़े चेहरों के साथ दूर रखना भी उनकी नाराजगी की वजह माना जा रहा है. आखिर ऐसा किस वजह से हुआ यह कोई बताने की स्थिति में नहीं है. शायद यह भी वजह है कि उन्होंने खुद ही बीजेपी से दूरी बना ली.
स्क्रिप्ट छह
बीजेपी में इस बार 100 से ज्यादा विधायकों के टिकट काटने की बात कही जा रही है. ऐसे में स्वामी प्रसाद मौर्य को लग रहा था कि कहीं उनका टिकट न कट जाए. साथ ही जिस बेटे के लिए उन्होंने टिकट मांगा है उसे भी बीजेपी के किनारे करने की आशंका जताई जा रही थी. यह वजह भी उनके इस्तीफे की मानी जा रही है.
स्क्रिप्ट सात
स्वामी प्रसाद मौर्य को यह अच्छी तरह से मालूम है कि वह बीजेपी में सौदेबाजी नहीं कर पाएंगे जबकि अखिलेश यादव को वह खुद के लिए डिप्टी सीएम की कुर्सी के लिए मना सकते हैं. इसकी वजह है सपा में इस वक्त उनके कद का कोई दूसरा सीनियर लीडर नहीं है. सपा में जाने से उनका कद और मजबूत होगा जबकि बीजेपी में उनको कोई पूछ नहीं रहा है.
स्क्रिप्ट आठ
ओबीसी वोट बैंक में पकड़ मजबूत करने के लिए भी यह उनकी चाल मानी जा रही है. वह ओबीसी समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि वह सत्ता के लालची नहीं हैं. इसका अनुमान उनके त्यागपत्र से लगता है. स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ ही जो भी विधायक और नेता बीजेपी छोड़ रहे हैं वे एकसुर में बीजेपी पर दलितों और ओबीसी की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं. यह एक तरह से दलित और ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने की चाल भी हो सकती है.
स्क्रिप्ट नौ
यह पूरी कहानी पहले से ही बड़े ही सुनियोजित तरीके से रची गई है. अखिलेश यादव अच्छी तरह से जानते थे कि स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी आलाकमान से नाराज चल रहे हैं. उनसे हाथ मिलाने के लिए उन्होंने सुभासपा अध्यक्ष ओपी राजभर को लगाया. इसका परिणाम यह हुआ कि अखिलेश को ओबीसी का एक बड़ा चेहरा मिल गया. सिय़ासी मोहरे चलने में वह सभी से आगे निकल गए.
अभी तक की फिल्म के 14 पात्र ये रहे
बदायूं जिले के बिल्सी से विधायक राधा कृष्ण शर्मा, सीतापुर से विधायक राकेश राठौर, बहराइच के नानपारा से विधायक माधुरी वर्मा, संतकबीरनगर से भाजपा विधायक जय चौबे, स्वामी प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री, भगवती सागर, विधायक, बिल्हौर कानपुर, बृजेश प्रजापति, विधायक, रोशन लाल वर्मा, विधायक, विनय शाक्य, विधायक, अवतार सिंह भड़ाना, विधायक, दारा सिंह चौहान, कैबिनेट मंत्री, मुकेश वर्मा, विधायक, धर्म सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री, बाला प्रसाद अवस्थी विधायक अब तक बीजेपी छोड़ चुके हैं.
पिक्चर अभी बाकी है…
स्वामी प्रसाद मौर्या गैर-यादव ओबीसी के बड़े नेता हैं. कोइरी-कुशवाहा जाति पर उनकी अच्छी पकड़ है. इस जाति का वोट लगभग पांच फीसदी है. उन्हीं की बदौलत बीजेपी को पिछले चुनाव में अच्छी खासी सफलता मिली थी. बीते चुनाव में बीजेपी ने 125 ओबीसी उम्मीदवार चुनावी मैदान पर उतारे थे. अब 14 जनवरी को यह देखना रोचक होगा कि इस पिक्चर का फाइनल शॉट रिलीज होगा या फिर पिक्चर बाकी रहेगी.
संजय श्रीवास्तव-प्रधानसम्पादक एवम स्वत्वाधिकारी, अनिल शर्मा- निदेशक, शिवम श्रीवास्तव- जी.एम.

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